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बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दही खिलाने के फायदे, सावधानियां व रेसिपीज | Curd For Babies In Hindi
IN THIS ARTICLE
बचà¥à¤šà¥‡ दही कब खाना शà¥à¤°à¥‚ कर सकते हैं?
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठदही के फायदे
दही की नà¥à¤¯à¥‚टà¥à¤°à¤¿à¤¶à¤¨à¤² वैलà¥à¤¯à¥‚
पà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¾à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤•à¥à¤¸ कà¥à¤¯à¤¾ है और यह बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚ अचà¥à¤›à¤¾ होता है?
​शिशॠको यदि दूध से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है या लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤œ इनटॉलेरेंस है तो कà¥à¤¯à¤¾ करें?
शिशà¥à¤“ं के लिठगाय का दूध कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ अनà¥à¤¶à¤‚सित नहीं है, लेकिन दही है?
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठसही दही का चà¥à¤¨à¤¾à¤µ कैसे करें
शिशॠके लिठबिना फà¥à¤²à¥‡à¤µà¤°à¥à¤¡ या सादा दही अचà¥à¤›à¤¾ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ है?
सादे दही का सà¥à¤µà¤¾à¤¦ कैसे बेहतर बनाया जा सकता है?
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दही देते समय बरती जाने वाली सावधानियां
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठदही से बनने वाली टेसà¥à¤Ÿà¥€ रेसिपीज
शिशà¥à¤“ं के आहार को चà¥à¤¨à¤¨à¤¾ माता-पिता के लिठकिसी कठिन परीकà¥à¤·à¤¾ से कम नहीं होता। खासतौर से जब उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ ठोस आहार देने की उमà¥à¤° हो जाती है। à¤à¤¸à¥‡ में माता-पिता को चिंता सताती है कि कौन-सी चीज उनके शिशॠके लिठफायदेमंद है और कौन-सी नहीं। वैसे देखा जाठतो बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठपौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• आहारों की कमी नहीं है। इन सब में à¤à¤• नाम दही का à¤à¥€ है। शिशà¥à¤“ं के लिठदही किसी सà¥à¤ªà¤°à¤«à¥‚ड से कम नहीं होता है। यही वजह है कि मॉमजंकà¥à¤¶à¤¨ के इस लेख में हम बताने वाले हैं बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठदही के फायदे कà¥à¤¯à¤¾ हो सकते हैं। साथ ही आप पढ़ेंगे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दही देने से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ अनà¥à¤¯ कई जरूरी जानकारियां à¤à¥€à¥¤
चलिठसबसे पहले जानते हैं कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कौन-सी आयॠमें दही खिला सकते हैं।
बचà¥à¤šà¥‡ दही कब खाना शà¥à¤°à¥‚ कर सकते हैं?
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठदही के फायदों को जानने से पहले यह जानना जरूरी है कि शिशà¥à¤“ं को दही कौन-सी उमà¥à¤° से खिलाना शà¥à¤°à¥‚ कर देना चाहिà¤à¥¤ सीडीसी (Centers for Disease Control and Prevention) के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° जब बचà¥à¤šà¥‡ 7 से 8 महीने के हो जाà¤à¤‚ तो उनके सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ विकास के लिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अलग-अलग विटामिनà¥à¤¸ और मिनरलà¥à¤¸ यà¥à¤•à¥à¤¤ आहार दिठजा सकते हैं। इसी लिसà¥à¤Ÿ में दही का नाम à¤à¥€ शामिल है (1)। वहीं, डबà¥à¤²à¥à¤¯à¥‚à¤à¤šà¤“ (World Health Organization) के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° बचà¥à¤šà¥‡ के 6 महीने की उमà¥à¤° के बाद दही का सेवन कराने की सलाह दी गई है (2)। आगे हम बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठदही के लाठसे जà¥à¤¡à¤¼à¥€ जरूरी जानकारियां विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से दे रहे हैं।
अब लेख के इस à¤à¤¾à¤— में जानिठबचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठदही के कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ लाठहो सकते हैं।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठदही के फायदे
शिशà¥à¤“ं के लिठदही खिलाने के à¤à¤• या दो नहीं, बलà¥à¤•ि 10 से à¤à¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ फायदे हैं। à¤à¤¸à¥‡ में लेख इस à¤à¤¾à¤— में हम शिशà¥à¤“ं को दही खिलाने के फायदे विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से साà¤à¤¾ कर रहे हैं। तो शिशà¥à¤“ं के लिठदही के फायदे कà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार हैं –
1. दसà¥à¤¤ की समसà¥à¤¯à¤¾ से राहत
दही का सेवन शिशà¥à¤“ं में दसà¥à¤¤ की समसà¥à¤¯à¤¾ को कम करने में मदद कर सकता है। à¤à¤¨à¤¸à¥€à¤¬à¥€à¤†à¤ˆ की वेबसाइट पर पà¥à¤°à¤•ाशित à¤à¤• शोध में बताया गया है कि 6 से 24 महीने के शिशà¥à¤“ं को दही का सेवन कराने के बाद उनके दसà¥à¤¤ की समसà¥à¤¯à¤¾ में कà¥à¤› हद तक सà¥à¤§à¤¾à¤° देखा गया है (3)। इस आधार पर मान सकते हैं कि दही दसà¥à¤¤ से बचाव या कà¥à¤› हद तक राहत दिलाने में सहायक हो सकता है। हालांकि, धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि अगर बचà¥à¤šà¥‡ में दसà¥à¤¤ की परेशानी अधिक हो तो डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ इलाज को पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤•ता दें।
2. गैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤à¤‚टेराइटिस के लिà¤
शोध बताते हैं कि à¤à¤• वरà¥à¤· तक के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दही का सेवन कराने से उनमें गैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤à¤‚टेराइटिस (Gastroenteritis) के जोखिमों को किया जा सकता है (4)। बता दें कि, गैसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤à¤‚टेराइटिस आंतों में होने वाला à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का सूजन है जो वायरस, बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ या परजीवी के कारण हो सकता है। इसमें पेट दरà¥à¤¦, दसà¥à¤¤, सिरदरà¥à¤¦ जैसे लकà¥à¤·à¤£ दिख सकते हैं (5)।
3. à¤à¤•à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾ के लिà¤
दही के सेवन से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को à¤à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• डरà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ (Atopic dermatitis) की समसà¥à¤¯à¤¾ से à¤à¥€ निजात मिल सकता है (6)। दरअसल, à¤à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• डरà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का à¤à¤•à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾ है, जिसमें तà¥à¤µà¤šà¤¾ लाल हो जाती है और उसमें सूजन à¤à¤µà¤‚ खà¥à¤œà¤²à¥€ होने लगती है। यह समसà¥à¤¯à¤¾ लंबे समय तक रह सकती है और नवजात शिशà¥à¤“ं में यह बेहद आम माना जाता है (7)।
4. हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के लिà¤
दही बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की कमी को à¤à¥€ पूरा कर सकता है, जो बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के विकास और मजबूती के लिठलाà¤à¤•ारी माना गया है (8)। दरअसल, कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® शरीर में à¤à¤• महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¤¾ है। शरीर में कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® का 99 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ से अधिक à¤à¤¾à¤— दांतों और हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में संगà¥à¤°à¤¹à¤¿à¤¤ होता है, जो इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मजबूत बनाने में सहायक हो सकता है (9)। तो बढ़ते बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रखने के लिठकैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® यà¥à¤•à¥à¤¤ दही लाà¤à¤•ारी हो सकता है।
5. दांतों के लिà¤
हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के साथ-साथ दही में मौजूद कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® का बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की दांतों पर à¤à¥€ सकारातà¥à¤®à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ सकता है। इस पर हà¥à¤ अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨à¥‹à¤‚ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, दही का सेवन दांतों की कà¥à¤·à¤°à¤£ (Tooth erosion) की समसà¥à¤¯à¤¾ को कम करने या उससे बचाव में पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ साबित हो सकता है (8)। à¤à¤¸à¥‡ में मान सकते हैं कि बचà¥à¤šà¥‡ के सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ दांतों के लिठदही उपयोगी हो सकता है।
6. पेट के लिà¤
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दही खिलाने के फायदों में पेट की सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ à¤à¥€ शामिल है। दही पेट संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं से बचाव के लिठउपयोगी हो सकता है। हमने पहले ही जानकारी दी है कि यह बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में दसà¥à¤¤ की समसà¥à¤¯à¤¾ में लाà¤à¤•ारी पाया गया है (10)। साथ ही पेट के कैंसर (Colon Cancer) से बचाव के लिठà¤à¥€ दही का सेवन à¤à¤• आसान और अचà¥à¤›à¤¾ विकलà¥à¤ª हो सकता है (11)। वहीं, अगर किसी बचà¥à¤šà¥‡ को लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤œ इनटॉलेरेंस है तो उसके आहार में à¤à¥€ दही को शामिल किया जा सकता है (12)।
7. कॉलिक के लिà¤
शिशà¥à¤“ं में कॉलिक की समसà¥à¤¯à¤¾ के उपचार के लिठà¤à¥€ दही में मौजूद पà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¾à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤•à¥à¤¸ को मददगार माना गया है (13)। दरअसल, कॉलिक à¤à¤• सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है, जिसमें बचà¥à¤šà¤¾ बिना किसी कारण घंटों रोता रहता है या चिड़चिड़ा रहता है। वहीं, शोध के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• लगà¤à¤— 20 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कॉलिक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है (14)। वहीं, अगर बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¤• दिन में तीन घंटे से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ रोता है, तो हो सकता है वो कॉलिक की समसà¥à¤¯à¤¾ से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो (15)।
8. à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ से बचाव के लिà¤
दही का सेवन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में खून की कमी की समसà¥à¤¯à¤¾ के खतरे को à¤à¥€ कम कर सकता है। बता दें कि, कà¥à¤› सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में फोलेट की कमी à¤à¥€ à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ का कारण हो सकता है। फोलेट रेड बà¥à¤²à¤¡ सेल के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ में सहायक हो सकता है, जिससे à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ की समसà¥à¤¯à¤¾ का जोखिम कम हो सकता है (16)। वहीं, दही में फोलेट मौजूद होता है (17)। à¤à¤¸à¥‡ में इस आधार पर माना जा सकता है कि à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ से बचाव के लिठदही उपयोगी हो सकता है।
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9. इमà¥à¤¯à¥‚निटी के लिà¤
बड़ों के मà¥à¤•ाबलों बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ कमजोर होती है (18)। इस कारण बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के जलà¥à¤¦à¥€ बीमार होने का खतरा अधिक रहता है। à¤à¤¸à¥‡ में दही का सेवन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को बढ़ाने के लिठà¤à¥€ फायदेमंद माना जा सकता है (8)।
दही को इमà¥à¤¯à¥‚न पावर बेहतर करने के खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ के लिसà¥à¤Ÿ में जगह दी गई है। दरअसल, दही कई पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ का सà¥à¤°à¥‹à¤¤ है, इससे पेट के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ में सà¥à¤§à¤¾à¤° हो सकता है। यह आंत के बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने के साथ-साथ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ के कारà¥à¤¯ को बेहतर करने और शरीर में सूजन की समसà¥à¤¯à¤¾ को कम करने में सहायक हो सकता है (19)। इस आधार पर दही को बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठसà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ मान सकते हैं।
10. पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र
दही शिशà¥à¤“ं के लिठइसलिठà¤à¥€ लाà¤à¤•ारी माना जा सकता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ से à¤à¥€ à¤à¤°à¤ªà¥‚र होता है (17)। बताया जाता है कि पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के विकास और वृदà¥à¤§à¤¿ के लिठमहतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ में से à¤à¤• है (20)। à¤à¤¸à¥‡ में यह कहना गलत नहीं होगा कि अनà¥à¤¯ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ के साथ दही का सेवन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की कमी को पूरा कर सकता है।
11. बà¥à¤²à¤¡ इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से बचाव के लिà¤
खून में संकà¥à¤°à¤®à¤£ यानी सेपà¥à¤¸à¤¿à¤¸ की समसà¥à¤¯à¤¾ से à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को बचाने के लिठदही लाà¤à¤•ारी साबित हो सकता है। इसके पीछे दही में मौजूद पà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¾à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤•à¥à¤¸ को जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° बताया गया है (13)। सेपà¥à¤¸à¤¿à¤¸ à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ बीमारी है, जिसमें शरीर बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ या अनà¥à¤¯ कीटाणà¥à¤“ं को पनपने का मौका देता है (21)। हालांकि, हम यह सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ कर दें कि सेपà¥à¤¸à¤¿à¤¸ à¤à¤• गंà¤à¥€à¤° समसà¥à¤¯à¤¾ है और दही को इसका इलाज समà¤à¤¨à¥‡ की à¤à¥‚ल न करें। अगर किसी बचà¥à¤šà¥‡ को यह बीमारी है तो डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ इलाज को पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤•ता दें। दही का सेवन सिरà¥à¤« सेपà¥à¤¸à¤¿à¤¸ के जोखिम को कम कर सकता है।
12. हृदय के लिà¤
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में हृदय रोग की रोकथाम के लिठà¤à¥€ दही का सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है। इससे जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ à¤à¤• रिसरà¥à¤š में इस बात का जिकà¥à¤° मिलता है कि सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ आहार के रूप में दही का सेवन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में वजन को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ कर हृदय रोग के जोखिमों को कम कर सकता है (22)। इसके अलावा, à¤à¤• अनà¥à¤¯ शोध में इस बात की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ हà¥à¤ˆ है कि उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª से पीड़ित पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ और महिलाओं ने जब दही का सेवन किया तो उनमें हृदय रोग का जोखिम कम पाया गया (23)। तो à¤à¤¸à¥‡ में दही के सेवन से न सिरà¥à¤« हृदय सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ हो सकता है, बलà¥à¤•ि बचà¥à¤šà¥‡ में उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª का जोखिम à¤à¥€ कम हो सकता है।
लेख के इस हिसà¥à¤¸à¥‡ में जानिठदही में मौजूद पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ के बारे में।
दही की नà¥à¤¯à¥‚टà¥à¤°à¤¿à¤¶à¤¨à¤² वैलà¥à¤¯à¥‚
यहां हम 100 गà¥à¤°à¤¾à¤® दही में मौजूद पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जो कà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार है (17) –
100 गà¥à¤°à¤¾à¤® दही में 85.07 गà¥à¤°à¤¾à¤® पानी, 63 किलो कैलोरी à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€, 5.25 गà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, 1.55 गà¥à¤°à¤¾à¤® फैट, 7.04 गà¥à¤°à¤¾à¤® कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ और 7.04 गà¥à¤°à¤¾à¤® शà¥à¤—र मौजूद होता है।
इसके अलावा, 100 गà¥à¤°à¤¾à¤® दही में 183 à¤à¤®à¤œà¥€ कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, 0.08 à¤à¤®à¤œà¥€ आयरन, 17 à¤à¤®à¤œà¥€ मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤®, 114 à¤à¤®à¤œà¥€ फासà¥à¤«à¥‹à¤°à¤¸, 234 à¤à¤®à¤œà¥€ पोटाशियम, 70 à¤à¤®à¤œà¥€ सोडियम और 0.89 à¤à¤®à¤œà¥€ जिंक मौजूद होता है।
यही नहीं, इसमें 0.013 à¤à¤®à¤œà¥€ कॉपर, 0.004 à¤à¤®à¤œà¥€ मैंगनीज, 3.3 µg (माइकà¥à¤°à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤®) सेलेनियम, 12 µg फà¥à¤²à¥‹à¤°à¤¾à¤‡à¤¡, 0.8 à¤à¤®à¤œà¥€ विटामिन-सी, 0.044 à¤à¤®à¤œà¥€ थियामिन, 0.214 à¤à¤®à¤œà¥€ राइबोफà¥à¤²à¥‡à¤µà¤¿à¤¨, 0.114 à¤à¤®à¤œà¥€ नियासिन, और 0.591 à¤à¤®à¤œà¥€ पैंटोथैनिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ मौजूद होते हैं।
वहीं, 100 गà¥à¤°à¤¾à¤® दही 0.049 à¤à¤®à¤œà¥€ विटामिन बी-6, 11 µg फोलेट, 15.2 à¤à¤®à¤œà¥€ कोलिन, 0.56 µg विटामिन-बी12, और 14 µg विटामिन-ठहोता है।
यहां हम पà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¾à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤•à¥à¤¸ का मतलब और बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठइसके लाà¤à¥‹à¤‚ को समà¤à¤¾à¤à¤‚गे।
पà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¾à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤•à¥à¤¸ कà¥à¤¯à¤¾ है और यह बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚ अचà¥à¤›à¤¾ होता है?
पà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¾à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤•à¥à¤¸ à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार के जीवित सूकà¥à¤·à¥à¤® जीव होते हैं, जो शरीर के लिठअचà¥à¤›à¥‡ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के रूप में जाने जाते हैं। ये बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ शरीर में जाने के बाद कई पà¥à¤°à¤•ार के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ लाठपहà¥à¤‚चा सकते हैं। आंत के रोगों की रोकथाम, पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ में सà¥à¤§à¤¾à¤°, उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª से बचाव आदि के लिठये फायदेमंद हो सकते हैं। ये दही जैसे अनà¥à¤¯ फरà¥à¤®à¥‡à¤‚टेड खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ और पूरक आहार में पाठजाते हैं (24)।
अब जानते हैं कि, पà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¾à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤•à¥à¤¸ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚ अचà¥à¤›à¤¾ होता है। बता दें कि पà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¾à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤•à¥à¤¸ शिशà¥à¤“ं को कई पà¥à¤°à¤•ार से लाठपहà¥à¤‚चा सकते हैं। इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ फायदों के लिठये बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठउपयोगी माने जा सकते हैं। पà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¾à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤•à¥à¤¸ के लाठकà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार हैं (13)–
पà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¾à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤•à¥à¤¸ शिशà¥à¤“ं में दसà¥à¤¤ का कारण बनने वाले बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को खतà¥à¤® कर दसà¥à¤¤ की रोकथाम के लिठकारगर साबित हो सकते हैं।
पà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¾à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤•à¥à¤¸, शिशà¥à¤“ं में कॉलिक (उदरशूल) के उपचार में à¤à¥€ मददगार हो सकते हैं।
पेरियोडोंटल (मसूड़ों सेसंबंधित) समसà¥à¤¯à¤¾ के उपचार के लिठà¤à¥€ पà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¾à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤•à¥à¤¸ मददगार माने जाते हैं।
अलà¥à¤¸à¤°à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤µ कोलाइटिस (आंत में सूजन होना) से राहत दिलाने के लिठà¤à¥€ पà¥à¤°à¥‹à¤¬à¤¾à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤•à¥à¤¸ को लाà¤à¤•ारी माना जा सकता है।
यहां हम बताà¤à¤‚गे कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को अगर दूध से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है या लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤œ इनटॉलेरेंस है तो कà¥à¤¯à¤¾ करना चाहिà¤à¥¤
​शिशॠको यदि दूध से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है या लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤œ इनटॉलेरेंस है तो कà¥à¤¯à¤¾ करें?
अगर किसी बचà¥à¤šà¥‡ को दूध से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ या फिर लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤œ इनटॉलेरेंस है तो à¤à¤¸à¥‡ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दही का सेवन करा सकते हैं। दरअसल, दही में अनà¥à¤¯ दूध के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ के मà¥à¤•ाबले कम लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤œ (à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨)होता है (12)। वहीं, अगर बचà¥à¤šà¥‡ को दही या फिर किसी अनà¥à¤¯ दूध उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦ से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है या नहीं इसकी पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ करनी है तो à¤à¤¸à¥‡ में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पहली बार दही का सेवन कराने के बाद कम से कम तीन दिन तक इंतजार करें। इससे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के कारण का पता लगाने में आसानी हो सकती है।
अब जरा ये à¤à¥€ समठलीजिठकि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को गाय का दूध देने के बजाय दही का सेवन कराने की सलाह कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ दी जाती है।
शिशà¥à¤“ं के लिठगाय का दूध कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ अनà¥à¤¶à¤‚सित नहीं है, लेकिन दही है?
शिशà¥à¤“ं के लिठगाय का दूध अनà¥à¤¶à¤‚सित नहीं है, लेकिन दही है। à¤à¤¸à¤¾ इसलिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि गाय के दूध से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कà¥à¤› विशेष पोषक ततà¥à¤µ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ नहीं होते हैं। इसके अलावा, शिशà¥à¤“ं के लिठगाय के दूध में मौजूद पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ और वसा को पचाना मà¥à¤¶à¥à¤•िल होता है। वहीं, गाय के दूध से बचà¥à¤šà¥‡ को à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का जोखिम à¤à¥€ हो सकता है। यही वजह है कि शिशà¥à¤“ं के लिठगाय का दूध सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ नहीं माना जाता है। हालांकि, à¤à¤• वरà¥à¤· की आयॠके बाद बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को गाय का दूध दिठजाने की सलाह दी जा सकती है (25)।
वहीं, à¤à¤¨à¤¸à¥€à¤¬à¥€à¤†à¤ˆ की वेबसाइट पर पà¥à¤°à¤•ाशित à¤à¤• शोध में जिकà¥à¤° मिलता है कि गाय के दूध से जब दही बनाया जाता है तो इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के दौरान दूध में मौजूद लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤œ की मातà¥à¤°à¤¾ में कमी आ जाती है। वहीं, इसमें लैकà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ (Lactase- à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार का à¤à¤‚जाइम) में बढ़ोतरी हो जाती है (26)। बता दें लैकà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ दूध या दूध यà¥à¤•à¥à¤¤ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को पचाने में सहायक हो सकता है (12)। à¤à¤¸à¥‡ में इस आधार पर मान सकते हैं कि बचà¥à¤šà¥‡ दूध के मà¥à¤•ाबले दही को आसानी से पचा पाते हैं।
अब बारी आती है दही के सही चà¥à¤¨à¤¾à¤µ के बारे में टिपà¥à¤¸ जानने की।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठसही दही का चà¥à¤¨à¤¾à¤µ कैसे करें
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठसही दही का चà¥à¤¨à¤¾à¤µ करने के लिठनिमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना चाहिठ–
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठहमेशा सादे दही का चà¥à¤¨à¤¾à¤µ करें।
दही का चà¥à¤¨à¤¾à¤µ करते समय उसके लेवल को चेक कर सकते हैं। इससे उसमें मौजूद पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की जानकारी मिल जाà¤à¤—ी।
अगर दही बाजार से खरीद रहे हैं तो हमेशा ताजी दही का ही चà¥à¤¨à¤¾à¤µ करें।
दही खरीदते समय पैकेजिंग पर लिखी गई à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤¾à¤¯à¤°à¥€ डेट को जरूर चेक कर लें।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठहमेशा पाशà¥à¤šà¥à¤°à¥€à¤•ृत (Pasteurized) दूध से बने दही का ही चà¥à¤¨à¤¾à¤µ करें। बिना पाशà¥à¤šà¥à¤°à¥€à¤•ृत वाले दही में हानिकारक बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ होते हैं, जो बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठहानिकारक हो सकते हैं (1)।
सà¥à¤•à¥à¤°à¥‰à¤² कर पढ़ें बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठसादा दही कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ अचà¥à¤›à¤¾ माना जाता है।
शिशॠके लिठबिना फà¥à¤²à¥‡à¤µà¤°à¥à¤¡ या सादा दही अचà¥à¤›à¤¾ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ है?
छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दही खिलाना तो फायदेमंद माना जा सकता है, लेकिन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को हमेशा सादा दही खिलाने की ही सलाह दी जाती है। सादा या नेचà¥à¤°à¤² दही या डेयरी पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤Ÿ में चीनी की मातà¥à¤°à¤¾ कम होती है, जबकि फà¥à¤²à¥‡à¤µà¤°à¥à¤¡ दही या डेयरी पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤Ÿ में चीनी मिली हà¥à¤ˆ होती है। à¤à¤¸à¥‡ में से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दांत में सड़न की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है। इसके अलावा बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वजन à¤à¥€ बढ़ सकता है। वहीं, कà¥à¤› अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨à¥‹à¤‚ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, अनà¥à¤¯ चीनी उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ के की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤œ कम कारियोजेनिक (Cariogenic- दांतों में सड़न का कारण) होता है (8)। यही कारण है कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को फà¥à¤²à¥‡à¤µà¤°à¥à¤¡ की जगह सादा दही खिलाने की सलाह दी जाती है। इसलिठबचà¥à¤šà¥‡ के खाने-पीने की आदतों में फà¥à¤²à¥‡à¤µà¤°à¥à¤¡ चीजों को दूर रखने की कोशिश करें।
लेख के इस à¤à¤¾à¤— में जानिठसादे दही के सà¥à¤µà¤¾à¤¦ को बेहतर बनाने के टिपà¥à¤¸à¥¤
सादे दही का सà¥à¤µà¤¾à¤¦ कैसे बेहतर बनाया जा सकता है?
यूं तो बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को हमेशा सादा दही खिलाने की ही सलाह दी जाती है। वहीं, अगर कोई मां अपने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को खिलाने वाले दही में à¤à¤• अलग सà¥à¤µà¤¾à¤¦ जोड़ना चाहती हैं, तो उसमें कà¥à¤› फलों जैसे – सेब, कीवी को छोटे टà¥à¤•ड़ों में काट कर मिला सकती हैं। इसके अलावा चाहें तो दही में ओटà¥à¤¸ à¤à¥€ मिलाकर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को खिला सकते हैं। इस तरह से दही के सà¥à¤µà¤¾à¤¦ और पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ता को और बढ़ाया जा सकता है। बता दें कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठसेब, कीवी और ओटà¥à¤¸ तीनों को सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ माना गया है (27)।
आगे पढ़ें बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दही खिलाने के समय धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखने वाली बातों के बारे में।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दही देते समय बरती जाने वाली सावधानियां
शिशà¥à¤“ं को दही का सेवन कराते समय इन बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ अवशà¥à¤¯ रखना चाहिà¤-
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को हमेशा घर का बना दही ही देने की कोशिश करें।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° के परामरà¥à¤¶ पर शिशà¥à¤“ं को फà¥à¤² फैट दही दें।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दही देते समय उसमें चीनी या शहद न डालें। खासकर तब जब बचà¥à¤šà¤¾ à¤à¤• साल से छोटा हो। à¤à¤¸à¤¾ इसलिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को शहद देने पर इनà¥à¤«à¥‡à¤‚ट बॉटà¥à¤²à¤¿à¤œà¥à¤® (Infant botulism – बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के वजा से होने वाली गंà¤à¥€à¤° बीमारी) की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है (28)। वहीं, चीनी बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की दांतों में सड़न का कारण बन सकता है (29)।
छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को अधिक ठंडी दही का सेवन न कराà¤à¤‚।
दही का सà¥à¤µà¤¾à¤¦ बढ़ाने के लिठउसमें फलों को मिलाते वकà¥à¤¤ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि फलों के टà¥à¤•ड़े छोटे हो। बड़े टà¥à¤•ड़े के कारण बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में चोकिंग का खतरा बन सकता है।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को रात में दही का सेवन न कराने से बचें।
लेख के अंत में जाने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठदही के सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ रेसिपीज।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठदही से बनने वाली टेसà¥à¤Ÿà¥€ रेसिपीज
यहां हम बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठदही के कà¥à¤› सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ और पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• रेसिपीज साà¤à¤¾ कर रहे हैं। माता-पिता आसानी से इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बनाकर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को खिला सकते हैं। तो बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठदही से बनने वाली रेसिपीज कà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार हैं:
1. दही चावल
Dahi Chawal
सामगà¥à¤°à¥€ :
1 कप चावल
1 कप दही
1 बाउल
बनाने की विधि :
दही चावल बनाने के लिठà¤à¤• बरà¥à¤¤à¤¨ में चावल को अचà¥à¤›à¥€ तरह से धो लें।
फिर उसे पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤° कà¥à¤•र में पानी के साथ डालकर पकने के लिठचढ़ा दें।
दूसरी तरफ à¤à¤• बाउल में दही को अचà¥à¤›à¥€ तरह से फेंट लें।
जब चावल पक जाठतो उसे थोड़ा ठंडा होने के लिठछोड़ दें।
ठंडा होने के बाद दही में चावल को अचà¥à¤›à¥‡ से मिला लें और बचà¥à¤šà¥‡ को परोसें।
2. दही रायता
Dahi Raita
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सामगà¥à¤°à¥€ :
1 कप दही
1 चमà¥à¤®à¤š बूंदी (घर का बना हà¥à¤†)
बनाने की विधि :
सबसे पहले दही को à¤à¤• बाउल में डालकर उसे अचà¥à¤›à¥‡ से फेंट लें।
अब इसमें घर का बना हà¥à¤† बूंदी मिलाà¤à¤‚।
फिर पराठे या रोटी के साथ इस रायता को बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दें।
चाहें तो बचà¥à¤šà¥‡ को फà¥à¤°à¥‚ट रायता à¤à¥€ दे सकते हैं। करना बस इतना है कि दही में बूंदी की जगह फलों को छोटे टà¥à¤•ड़ों में मिला दें।
3. दही ओटà¥à¤¸
dahi-oats
सामगà¥à¤°à¥€ :
1 कप दही
आधा कप ओटà¥à¤¸
1 बाउल
बनाने की विधि:
दही ओटà¥à¤¸ बनाने के लिठसबसे पहले दही को à¤à¤• बाउल में अचà¥à¤›à¥‡ से फेंट लें।
अब इसमें ओटà¥à¤¸ मिलाà¤à¤‚। अगर शिशॠà¤à¤• साल से छोटा है तो कोशिश करें कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठओटà¥à¤¸ पाउडर का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें।
इस तरह तैयार हो जाà¤à¤—ा, शिशà¥à¤“ं का à¤à¥‹à¤œà¤¨ दही ओटà¥à¤¸à¥¤
आशा करते हैं कि इस लेख को पढ़ने के बाद बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दही खिलाने के लाठऔर उपयोग के बारे में आपको उचित जानकारी मिल गई होगी। इसके अलावा यहां हमने शिशà¥à¤“ं को दही खिलाने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में à¤à¥€ बताया है। तो à¤à¤¸à¥‡ में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दही खिलाने के समय लेख में बताई गई बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ जरूर रखें। उमà¥à¤®à¥€à¤¦ है हमारा यह लेख आपके लिठउपयोगी रहा होगा। शिशॠसà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ à¤à¤¸à¥‡ ही अनà¥à¤¯ विषयों के बारे में जानने के लिठजà¥à¤¡à¤¼à¥‡ रहिठमॉमजंकà¥à¤¶à¤¨ से।
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